Teri yaad aa ke pardo ko hila gyi

Best Urdu Ghazal Shayari - Whenever I wanted to listen to you, The scenes of your memory were shaken - Urdu Poetry

Is aakhri chiraag ko bhi bujha gyi
Hawa mera ghar dekh ke baukhla gyi
Main le ke baitha tha dariya mein tere khat
Ik mauj aayi aur le ke baha gyi
Tab se main khud se bhi door ho gya hun
Jab se tu mujh se yun door kya gyi
Maine jab bhi chahaa teri aahat sunna
Teri yaad aa ke pardo.n ko hila gyi
Mere har kadam pe thi.n ruswaaiyan hi.n
Achha hua jo tu daaman bacha gyi

Heart Touching Urdu Shayari

इस आखरी चिराग को भी बुझा गयी
हवा मेरा घर देख के बौखला गयी
मैं ले के बैठा था दरिया में तेरे ख़त
इक मौज आई और ले के बहा गयी
तब से मैं खुद से भी दूर हो गया हूँ
जब से तू मुझ से यूँ दूर क्या गयी
मैंने जब भी चाहा तेरी आहट सुनना
तेरी याद आ के पर्दों को हिला गयी
मेरे हर कदम पे थीं रुस्वाइयाँ हीं
अच्छा हुआ जो तू दामन बचा गयी



Urdu Shayari with Image

shayari, urdu shayari, sad shayari, ghazal shayari, urdu poetry, gazal shayari
Follow Me 🙂

Sunny Singh "Akash"

Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
Follow Me 🙂

Latest posts by Sunny Singh "Akash" (see all)

Leave a Reply

41 comments on “Teri yaad aa ke pardo ko hila gyi

Bhai bahot khub
bahot badiya

Nice very nice mainly dis line….maine job bhi…..pordo ko hila gyi….superb

शुक्रिया शफाली जी 🙂
मैंने जब भी चाहा तेरी आहट सुनना
तेरी याद आ के पर्दों को हिला गयी

हाहाहा कोई बात नही जी ….जो आपका मन चाहे वो बोल सकते हो आप 🙂

Sorry galat likh diya tha mtlb tha ka bole

हाहाहा आखिर ही समझ लीजिये अब

शुक्रिया पायल जी
️तब से मैं खुद से भी दूर हो गया हूँ ️
️जब से तू मुझ से यूँ दूर क्या गयी ️

शुक्रिया कृष्णा जी 🙂
इस आखरी चिराग को भी बुझा गयी
हवा मेरा घर देख के बौखला गयी

शुक्रिया ख़ुशी जी 🙂
मेरे हर कदम पे थीं रुस्वाइयाँ हीं
अच्छा हुआ जो तू दामन बचा गयी

शुक्रिया नरेंदर जी 🙂
️तब से मैं खुद से भी दूर हो गया हूँ ️
️जब से तू मुझ से यूँ दूर क्या गयी ️

बहुत बहुत शुक्रिया सर
मैं ले के बैठा था दरिया में तेरे ख़त
इक मौज आई और ले के बहा गयी

Bht karreb hai koi aap ke

Bahut bahut shukriya Dolly ji
मैंने जब भी चाहा तेरी आहट सुनना
तेरी याद आ के पर्दों को हिला गयी

Kht bahaye jaa Skte pr koi dariya dil se yaade nhi mita skta. Hhh

aaaap aakhir ho kya… bhut khub

बहुत ही खूबसूरत कल्पना
लाजवाब संरचना..
.
इक मौज आई और ले के बहा गई

शुक्रिया अंजली जी
मैं ले के बैठा था दरिया में तेरे ख़त
इक मौज आई और ले के बहा गयी

wah paaji kya baat hai
इस आखरी चिराग को भी बुझा गयी
हवा मेरा घर देख के बौखला गयी

aapki har alfaj aapse ru b ru krwa rhi h…
aapki drdo ko ye alfaj gajlo m bayyan kr hi h

शुक्रिया भारद्वाज साहब जी
मैंने जब भी चाहा तेरी आहट सुनना
तेरी याद आ के पर्दों को हिला गयी

बहुत बहुत शुक्रिया साहिल साहब
इस आखरी चिराग को भी बुझा गयी
हवा मेरा घर देख के बौखला गयी

Kya bat hain… Dada.. Lajwaab…

Har ek sher zinda kahani lag rahi hain

[…] ?तेरी याद आ के पर्दों को हिला गयी ? (471) […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Sponsored

Like on Facebook