ये उदास क्यों करने लगा है तेरा अब इश्क़ मुझे | Ghazal Shayari

गैर के जिस्म में भी तुम्हारा अक्स ढूंढा करता हूँ
मैं तुम्हारी तलाश में कहाँ-कहाँ नहीं भटकता हूँ
मोहब्बत की नस्लों को ही जो मिटा देना चाहती हों
मैं ऐसे रस्मों-रिवाज़ों को जूते की नोक पे रखता हूँ
तुम मिल कर फिर से बिछड़ गए तो क्या होगा
तुम्हारी जुस्तजू में निकला तो हूँ मगर डरता हूँ
ये उदास क्यों करने लगा है तेरा अब इश्क़ मुझे
उस इश्क़ को क्या हुआ मैं जिससे राहत पाता हूँ
तुम्हारा ग़म अब दिल के लहू में भी घुल गया है
तुम्हें जान के दुःख होगा के मैं अब लहू थूकता हूँ
दिल तो निसार कर ही चूका था मैं कब का तुम पर
इक जां बची थी लो आज वो भी निसार करता हूँ
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07/12/2018 11:49AM
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Sunny Singh "Akash"

Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
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