Wo Kuchh Der Se Kahta Main Hi Jaldi Chala Aaya

उसे इज़हार - ए - इश्क़ में ज़रा वक़्त लगता हो सकता है
वो कुछ देर से कहता मैं ही जल्दी चला आया हो सकता है

शायद मुझे ही सलीका ना आया हो मिलने का किसी से भी
मैं सोचता हूँ जितनी उतनी बुरी ना हो दुनिया हो सकता है

उसे जो रास आ गई किसी और की मोहब्बत तो रंज कैसा
मैंने ही कहीं उसे उस की तरह ना हो चाहा हो सकता है

दिल जिस के साथ सोच के बैठा है अब अफ़साना तमाम
उसके साथ लिखा हो कोई और भी किस्सा हो सकता है

बे-ख़ुदी ने मुझे तेरे बाद भी तेरा रखा हुआ है अब तलक
वर्ना शहर-ए-हुस्न की बरहनगी ही मैं देखता हो सकता है
(बे-ख़ुदी -intoxication, अपने-आप से बे-ख़बर होना,
आत्मविस्मृति, अपने आप को भूल जाना)
(बरहनगी - nudity, नग्नता)

Check Out: इक तितली तेरे बारे में फूलों से पूछा करती है

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30/5/19 3:40AM
#SunnySinghAkash
Hijr Shayari, Mujh Mein Ek Baghi Rahta Hai
Yaad Shayari, Har Surat Hi Sanwali Si Lage

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Sunny Singh "Akash"

Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
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