Poetry Recitation Contest

The Poet of Love Poetry Recitation Contest

Poetry Recitation Contest
This is to inform that The Poet of Love is going to organize Weekly Poetry Contest for their own selected poems from June 26, 2019 to July 2, 2019. The time limit for each participant is 3 to 10 minutes including the introduction. Recitation shorter than 3 minutes or exceeding 10 minutes shall be declared disqualified. Paper reading is strictly prohibited.
Contest prize: 1000 Rs 

How to join?

  • Select single poem from our given poems and recite or sing it.
  • Include few words about poem and poet in the starting of the video
    (Introduction necessary)
  • Use royalty free music in the video.
  • Send your video in the message box of our fb page including your
    real name and UPI ID for payment.

PHYSICAL PRESENCE

Body language, and poise.

Tips:

  • Present yourself well and be attentive. Use good posture. Be confident and make a direct connection with the audience.
  • Nervous gestures, poor eye contact with the audience, and lack of poise or confidence will detract from your score.
  • Relax and be natural. Enjoy your poem—the judges will notice.

Qualities of a strong recitation:

Ease and comfort with the audience. Engagement with the audience through physical presence, including appropriate body language and confidence—without appearing artificial.

Video Examples:

 

Poem 1

Category: Ghazal

Poet: Sunny Singh "Akash"

उसे इज़हार - ए - इश्क़ में ज़रा वक़्त लगता हो सकता है
वो कुछ देर से कहता मैं ही जल्दी चला आया हो सकता है

शायद मुझे ही सलीका ना आया हो मिलने का किसी से भी
मैं सोचता हूँ जितनी उतनी बुरी ना हो दुनिया हो सकता है

उसे जो रास आ गई किसी और की मोहब्बत तो रंज कैसा
मैंने ही कहीं उसे उस की तरह ना हो चाहा हो सकता है

दिल जिस के साथ सोच के बैठा है अब अफ़साना तमाम
उसके साथ लिखा हो कोई और भी किस्सा हो सकता है

बे-ख़ुदी ने मुझे तेरे बाद भी तेरा रखा हुआ है अब तलक
वर्ना शहर-ए-हुस्न की बरहनगी ही मैं देखता हो सकता है
(बे-ख़ुदी -intoxication, अपने-आप से बे-ख़बर होना,
आत्मविस्मृति, अपने आप को भूल जाना)
(बरहनगी - nudity, नग्नता)

Poem 2

Category: Ghazal

Poet: Sunny Singh "Akash"

बस इतनी - सी ही परेशानी है
के मेरे दिल में बहुत वीरानी है

उसी के हुए सितम मुझ पर
मेरी करता जो निगहबानी है
(निगहबानी - protection,
देख-रेख; रक्षा; हिफ़ाज़त)

वो हर बार करके फ़ैसला ऐसा
मेरी आँखों को देता हैरानी है

मैं बिछड़ तो गया उससे लेकिन
मेरे दिल को अब पशेमानी है
(पशेमानी -repentance,
regret, shame, पछतावा)

रोना तो था ही इक दिन मुझे
हर बात जो दिल की मानी है

Poem 3

Category: Hindi Kavita

Poet: Sunny Singh "Akash"

दर्द है, कसक है,

उदास हूँ या मायूस हूँ

मेरी खामोशियों को देख के

ये सोचा ना कर जाँ

मैं तन्हा, खामोश

इसलिए रहता हूँ के

ताकि, तुझे सोच सकूँ

तुझे याद कर सकूँ

क्योंकि,

तेरे बारे में सोचना

तुम्हें याद करना

मुझे अच्छा लगता है

बहुत अच्छा लगता है

Poem 4

Category: Hindi Kavita

Poet: Sunny Singh "Akash"

इस जीवन पे तुम्हारा
क़र्ज़ है प्रिय!

क़र्ज़ -
बचपन की उस दोस्ती का
बचपन के उस प्रेम का
जो तुमसे मुझे मिला|

कितना ही प्रेम करती थी तुम मुझे
शायद उससे भी ज्यादा
जिसे तुम चाहती थी|

गुलाब का फूल देते समय
तुम तनिक भी नहीं शर्माती थी
सहेलियां तुम्हारी तुम्हें छेड़ती थीं
तुम फिर भी नहीं शर्माती थी|

इसका कारण यह भी था के
शायद तुमने मुझे मन से
अपना सखा माना था,
जैसे द्रोपदी ने कृष्ण को|
लेकिन मैं ही गंवार समय रहते
तुम्हारे मैत्रीपन के भावों को
समझ ही नहीं पाया||

समाज के न जाने किस डर से
तुम्हें सखी सवीकार ही नहीं पाया|
जिसमें जो भाव तुमने ढूंढे
वो कृष्ण मैं बन ही नहीं पाया|
और आज इतने बर्षों बाद
मन तुम्हें पुकारता है,
आँखें तुम्हें ढूंढती हैं',
तुम्हारा हाथ थाम कर
बचपन की उन्हीं गलियों पे
निकलने को दिल चाहता है
तो तुम कहीं भी नज़र नहीं आती हो||

देश के दुसरे हिस्से से
आया था मैं तुम्हारे शहर में
तुमसे कोई वास्ता भी नहीं था
अजनबी ही थी तुम मेरे लिए
लेकिन शायद तुम्हें मुझ में
किसी जन्म का कोई साथी
दिख ही गया था,
तुम्हारे मन न मुझे
पहचान ही लिया था|
लेकिन मैं ही पागल
तुम्हें पहचान ना पाया
और अब जब पहचाना है
तो तुम ना जाने कहाँ हो
तुम्हारा ना मिलना ही
इस जन्म में
शायद मेरी सज़ा है||

लेकिन मैं वादा करता हूँ सखी
किसी जन्म में मैं तुमसे फिर मिलूँगा
मैं आऊंगा फिर तुम्हारे लिए,
सिर्फ तुम्हारे लिए
तुम्हारी दोस्ती का कर्ज़
तुम्हारे प्रेम का ऋण
लौटाने के लिए...

Poem 5

Category: Hindi Kavita

Poet: Sunny Singh "Akash"

ओ अपरिचित,
यह तुमने क्या कर दिया है?

तुम से मिल कर तो मैं
अपना ही
परिचय भूल गया हूँ
तुम्हारे सौंदर्य ने
मुझ में रहते प्रेम को
और भी
प्रज्वलित कर दिया है

दर्पण में आज खुद को
ना पाकर,
तुम्हें ही बस पाया है

ओ अपरिचित,
मैं अब "मैं" नहीं रहा हूँ
मैं अब "तुम" हो गया हूँ

Poem 6

Category: Hindi Kavita

Poet: Sunny Singh "Akash"

मोहब्बत एक पहेली है,
चलती अकेली है।

कहीं पल भर न ठहरे,
कहीं से उम्र भर न निकले,
बड़ी अलबेली है।

किसी के लिए ये उजाड़ बस्ती,
किसी के लिए ये हवेली है।

बर्बाद दिलों को आबाद कर दे,
आबाद दिलों को बर्बाद कर दे,
इसके रंग वही जाने
जिसके साथ ये खेली है।

मोहब्बत एक पहेली है,
चलती अकेली है।

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Sunny Singh "Akash"

Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
Hindi Shayari, Mujhe Usi Ladki Se
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