Sir Pe Kisi Ko Chadhaya Nahi


Attitude shayari, Hindi shayari, ghazal

Attitude Shayari 😎

सर पे किसी को कभी चढ़ाया नहीं
जो रूठा उसे मैंने भी मनाया नहीं

उसे उम्मीद थी, लौट आऊंगा कभी
मैं उसका वक्त नहीं सो आया नहीं

जब सर कटने तक की नौबत थी
मैंने तब भी सर को झुकाया नहीं

मैं आज जो कुछ हूँ अपने दम पर हूँ
मैं जब गिरा था किसी ने उठाया नहीं

मैं तुम्हारे लिए हूँ बस किताब सा
"आकाश" तुमसे कुछ छुपाया नहीं

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