कुछ तन्हा सा


मैं हर रात कुछ तन्हा सा हो जाता हूँ,
पता नहीं उसकी झूठी बातों में कहाँ खो जाता हूँ,
वो मुझे याद तो आती है लेकिन क्या करूं
उसके पास जा नहीं सकता,
इसलिए उसकी यादों का तकिया बनाके सो जाता हूँ|
Latest posts by ArshMirza (see all)

Share Your Thoughts!

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!