हिंदी शायरी | शायरी हिंदी में | Shayri in Hindi


हिंदी शायरी | शायरी हिंदी में | Shayri in Hindi

३००+ बेहतरीन हिंदी शायरी। हमारे नवीनतम संग्रह से पढ़िए दिल को छू देने वाली शायरी हिंदी में। हम अक्सर जो आम बोल चाल की भाषा में किसी को नहीं समझा पाते हैं या अपने मन की बात नहीं कह पाते हैं, वो शायरी बहुत सरलता से कह जाती है। ये भी मुमकिन है के हर कोई शायरी लिखने में सक्षम भी नहीं होता है पर ऐसा भी नहीं के हम कभी लिख ही नहीं पाएं। आप हमारे हिंदी शायरी संग्रह से बेहतरीन शायरी पढ़िए और अनुभव कीजिये की कैसे कवि ने शायर ने अपने मन के भावों को रखने की कोशिश की है। धीरे - धीरे आप भी इस विद्या में निपुण हो जायेंगे और हिंदी में बेहतरीन शायरी लिखने में महारथ भी हासिल कर पाएंगे। हिंदी के उस्ताद कवि किस शैली में कविताएं लिखते थे, जानने के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

Love Romantic Shayari in Hindi

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रात भर भविष्य की
परिकल्पना के भंवर में
मैं समाता चला गया
और मन के दफ्तर में
आँखें हर घटना की
रात भर रिपोर्टिंग करती रहीं

कहानी के सब किरदार मर चुके थे
सिवाय एक तुम्हें और मुझे छोड़कर
रात एक दूजे के आगोश में थे हम
दुनिया के रीति-रिवाज़ों को तोड़कर

डूबते सूरज से तुम
चुटकी भर लाली ले आई थी
और तारों की उपस्थिति में
चाँद को साक्षी मान कर
मैंने तुम्हारी मांग सजाई थी

सितारों ने एकजुट होकर
इस लोक से उस लोक तक
एक पगडंडी बनाई थी
और स्वर्ग के द्वार पे देवताओं ने
फूलों की पंखुड़ियां बरसाई थीं

देवराज इंद्र ने सिंहासन से उठकर
हमारी ताजपोशी कराई थी
और एक दूजे के हाथों में हाथ लेकर
हमने प्रेम की हर रस्म निभाई थी

मन के अख़बार में यह
दिलचस्प घटना छप चुकी है
तुम्हारे हाथ कभी लगे तो
पढ़ना तुम भी।

19/06/2020 1:00 PM

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आँखों के फ़्रेम में
कई चेहरे चढ़े,
कई उतरे थे
पर मेरे प्रेम के अर्थ
जो समझता
कोई ना था
सबके दिलों के
कान बहरे थे

दिल के वीराने में
कुछ मुर्दा जिस्मों ने
बस्ती बसाई थी
काली घनी रातों में
मेरे हिस्से की सुबह
सर-ता-पा नहाई थी

तुमने भी तो मुझको
पुकारा है
बड़े प्रेम से मुझको
निहारा है
मेरे प्रेम के अर्थ कुछ
समझ आते हों तो
मेरे दिल के वीराने
अगर भाते हों तो
दिल की वीरान पड़ी
हवेली में अगर
मन लगता हो तो
दस्तक दो
और मुर्दा जिस्मों को
अपने प्रेम के घाट पे
मुक्ति दो

29/06/2020 2:42 PM

Hindi Kavita (हिंदी कविता)

तुम्हें देखता हूँ तो
सोचता हूँ के
किसी युग में दो चाँद
रहे होंगे आसमां में

युगों युगों तक मुझे
तुमसे प्रेम रहा होगा
और किसी युग में
तुम्हारी चाहत रही होगी

किसी जन्म में तुम्हें तुमसे ही
मांग लिया होगा मैंने
और तुमने भी मुस्कुरा कर
मेरे मन का रिक्त स्थान
भरने का वरदान दिया होगा

सितारों की सुंदर नगरी छोड़ कर
युगों से फिर तुम मेरे लिए
जीवन बन कर आती रही हो
और जीवन को गति देती रही हो

18/06/2020 10:01 AM

हिंदी शायरी _ शायरी हिंदी में _ Shayri in Hindi

तुम्हारे मन के नेत्रों पे डाला गया अवगुंठन है
जिसे तुम धर्म कहते हो ना वो महज़ संगठन है

गुरुओं की वाणी जितनी तुमने सुनी है
सजदों में जितना तुमने सर झुकाया है
और प्रार्थनाओं में जितने हाथ जोड़े हैं
मन का उतना ही अंधकार बढ़ाया है

अगर ये असत्य है तो फिर मन में क्यों ऐंठन है
जिसे तुम धर्म कहते हो ना वो महज़ संगठन है

जो तुमसे कही थी कहने को
कभी वही बातें ना तुमने बोलीं
जिसकी भी तुमने वाणी सुनी
उसी की तुमने दुकानें खोलीं

बुद्ध की यात्रा ना जब कर सके
तो तुम खुद ही से बुद्ध बन बैठे
ज्ञान की सरल परिभाषा से भी
तुम किस तरह अबुद्ध बन बैठे

चाहे जिसकी भी शरण में जाओ
ज्ञान की कोई भी पुस्तक उठाओ
उसके आरम्भ से लेकर अंत से
कुछ पहले तक सब ज्ञान है
और अगर अंत पढ़ लिया तो
तुम उस यात्रा के यात्री नहीं बन पाओगे
जिस पे चलते-चलते तुम्हारे गुरुओं,
पीरों - फकीरों, साधु - संतों ने
ईश्वर को पाने से पहले स्वयं को पाया है

क्यूंकि,
इन पुस्तकों के अंत में ही अंधकार है
"गुरु ही नैया पार लगाएंगे"

और यहीं मन में जलती लौ का शक्तिकुंठन है
जिसे तुम धर्म कहते हो ना वो महज़ संगठन है

15/6/2020 5:00 PM

Shayari in Hindi

मेरे दिल से ही फ़साद हो जाते हैं
तुम ज़ुल्फ़ों को खोला मत करो
मैं सुन लेती हूँ तुम्हारी धड़कन भी
कह दो के लबों से बोला मत करो

हिंदी शायरी _ शायरी हिंदी में _ Shayri in Hindi

सियाह रातों में विरह के उत्सव क्या देखे हैं तुमने
ह्रदय की पीड़ा के अंतिम छोर क्या छुए हैं तुमने

दिल के कांधों पे जब खुद की अर्थी होती है
और ऐसी घड़ी में जब स्मृतियाँ सार्थी होती हैं
माज़ी जब परीक्षक बन के आ खड़ा होता है
और दर्द से कराहती सांसें परीक्षार्थी होती हैं

तब व्यथित कंठ से मन के भेद क्या खोले हैं तुमने
ह्रदय की पीड़ा के अंतिम छोर क्या छुए हैं तुमने

मन का हर ख़्वाब जब बिखर गया हो
दिल का लहू आँखों में उतर आया हो
विरह की ऋतू ही छाई हो जब हर तरफ
और मन को कहीं ना करार आया हो

तब हार कर मृत्यु के द्वार जा के क्या चूमें हैं तुमने
ह्रदय की पीड़ा के अंतिम छोर क्या छुए हैं तुमने

14/06/2020 11:08 AM

मुझ पे कोई रात जब भारी रही
तुम्हारी तालाश फिर जारी रही

आज हृदय-नगरी में बड़ा शोर है
पर किस के पास इसका तोड़ है
रात के सन्नाटों में चलता जाता हूँ पर
तुम्हारी तरफ न जाता कोई मोड़ है

अधूरी मन की जब हमारी रही
तुम्हारी तालाश फिर जारी रही

दिल की सतहों को हटा के देखा नहीं
के तुम किस सतह के नीचे थी सो गई
तुझे पुकारता रहा मैं जाने कहां - कहां
और तुम मेरे अंदर ही थी कहीं खो गई

दिल की चिता जब जलती रही
और वहशत हम पे तारी रही
बात जब भी होती तुम्हारी रही
तुम्हारी तालाश फिर जारी रही

14/06/2020 5:48 AM

हिंदी शायरी

हिंदी शायरी _ शायरी हिंदी में _ Shayri in Hindi

तुम्हारे साथ मरना था, ना मर सका
रस्म-ए-इश्क़ भी अत्ता ना कर सका

तुम्हारी खुशबू में सिमट जाना था मुझे
तुम्हारी रूह से लिपट जाना था मुझे
इस जहाँ की तरह उस जहाँ का भी
तुम्हारे साथ सफ़र तय करना था मुझे

कहने को तो दुनिया थी पर फिर भी
तुम्हारे लिए ये दुनिया ना छोड़ सका
तुम स्वर्ग के द्वार से मुझे पुकारती रही
मैं नर्क के किवाड़ ना पर तोड़ सका।

हिंदी शायरी _ शायरी हिंदी में _ Shayri in Hindi

जो भी घाव मिले
वो मेरे मन को मिले
प्रेम आहत हुआ है
तो मेरा हुआ है

जो कुछ था वो
तेरे मेरे दरमियाँ था
तो फिर ये दुनिया
बिच में कैसे आ गयी

तुम्हें कोसने का अधिकार
दुनिया को किसने दिया
तुम तो मेरे अपराधी थे
तुम्हें कोई और सजा क्यों दे

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दुनिया की किसी शै में राहत नहीं मिलती
दिल को जब दिल की चाहत नहीं मिलती

दावत-ए-जल्वा दी है यूँ कई चेहरों ने मुझे
किसी सूरत से पर तेरी सूरत नहीं मिलती

मेरे पास तेरे ग़म की आख़िर सौगातें तो हैं
यहाँ सबको इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती

बहुत दूर निकल आया हूँ तेरी मोहब्बत में
अब लौट जाने की मुझे हिम्मत नहीं मिलती

दर्द की हर तह को छूने के बाद ही जाना है
मुझे जिंदगी इतनी ख़ूबसूरत नहीं मिलती

तुम बिन जीवन के क्या अर्थ हैं
तुम्हारे बाद सोचता हूँ तो व्यर्थ हैं

जीवन को गति देने में
तुम्हें भूल जाने की भी तो शर्त है
और ऐसा कर पाना
मेरे लिए मुमकिन ही कब है

तुम बिन वर्तमान में सुकून नहीं
तुम बिन भविष्य में भी दुःख है
मेरे लिए तो तुम संग अब बस
अतीत में लौट जाने में ही सुख है

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