Category Archives: Depression Shayari

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Depression Shayari, Shayari on Depression, Akelapan Shayari

इससे पहले के depression shayari या akelapan shayari का लुत्फ़ लिया जाये आइये थोड़ी सी पहले कुछ चर्चा कर लें। जिस तरह से आज कल की ज़िंदगी हो गयी है। डिप्रेशन का शिकार होना लाज़मी है। पर बातचीत से या थोड़ा सब्र रखा जाये तो इससे बाहर निकला जा सकता है। याद रखें के हमेशा एक सा वक़्त नहीं रहता है।

सुख है तो दुःख भी आएगा और दुःख है तो सुख भी आएगा। ये ज़िंदगी के रंग हैं, दो पहलु हैं। बस यही सोचिये के ये दिन भी लिखे थे भाग्य में और इन दिनों को इस तरह से जियें के कुदरत भी आपको देख कर प्रसन्न हो जाये और आने वाली नस्लों के लिए आप इंस्पिरेशन बन सकें। दर्द का भी लुत्फ़ लेना सीखिए दोस्तों क्यूंकि ऐसे हालातों में ही आप कुदरत और खुद के बेहद करीब होते हैं। दर्द से डरिये मत उसे समझिये और सच मानिये जब आप इसे समझ जायेंगे, दोस्ती कर लेंगे तब आप ज़िंदगी को भरपूर जी पाएंगे।

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Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
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Depression Shayari

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दिल का दिल को ही अब राज़दाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

शफ़्फ़ाफ़ आईना था मैं तो
पर वक़्त ने किया मुझे धूल है
अज़ाब कई आए मेरे दिल पे
पर क्या हुआ कहना फ़ुज़ूल है
हर हद तक की जद्दोजहद मैंने
पर अब सब मुझ को क़ुबूल है

दिल का उजड़ा हुआ ही मकाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

मेरे लबों पे मेरी कहानी आने दो
सर से ऊपर तक पानी आने दो
रूबरू हो सकूँ जहाँ खुद से मैं
डगर ऐसी भी अनजानी आने दो
आखिर कुछ तो मिले मुकम्मल
वीरानी है तो फिर वीरानी आने दो

किसी को तो मेरे वजूद का पासबाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

जब से दुनिया में बट गया हूँ
अपनी जड़ों से ही कट गया हूँ
अपनी ही बस्ती में अज़नबी हूँ
तारिक बादलों सा छट गया हूँ
याद तुम भी जब आये मुझे तो
मैं लेता करवट करवट गया हूँ

शायद लौटूं कभी मैं, अपने निशाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

17/06/2020 11:47 AM

Akelapan Shayari

Akelapan Shayari

यूँ तो तुम्हें मैं भूल भी गया था कई बार, NAZM SHAYARI, hindi shayari,

यूँ तो तुम्हें मैं भूल भी गया था कई बार
दिल को समझा भी लिया था कई बार
मैंने अहद-ए-वफ़ा भी था तोड़ दिया
अतीत का दामन भी था छोड़ दिया
पर फिर भी तुमने मुझसे वास्ता रखा
तुम तक आने का इक रास्ता रखा
तुमने अक्सर अतीत से आ-आ कर
प्रेम के भूले-बिसरे नग़्मे गा-गा कर
दिल की बेचैनी को बढ़ाती रही हो
तुम सपना बन-बनके आती रही हो

22/06/2020 1:28 PM

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