Category Archives: Hindi Urdu Ghazal

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Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
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Love Shayari 2020

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New Ghazal Love Shayari 2020

ज़माने भर से जो ग़र मेरे फ़ासले नहीं बनते
तो तेरे मेरे दरमियाँ भी फिर राब्ते नहीं बनते

कोई होता है जो उतर जाता है दिल में
वर्ना हर सूरत से इश्क़ के ज़ायक़े नहीं बनते

सूरत को तो संवारते हैं मगर सीरत को नहीं
दिल की मंशा जो बता सके आईने नहीं बनते

ऐसा भी हो ये भी मुमकिन है कभी - कभी
ज़िंदगी में हादसे ना हों तो रास्ते नहीं बनते

अब तो तेरी याद भी नहीं आती है मुझे
दिल की सतह पे अब बुलबुले नहीं बनते

An Urdu poet from Nasik, India
Sagar Rajput
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Hindi Shero Shayari 2020 | New Shero Shayari in Hindi

उसका आना भी देखा है
उसका जाना भी देखा है

इक पल में ही हमने तो
गुजरता जमाना देखा है

उससे ताल्लुक़ात ना सही
ख्वाब में तो आश्ना देखा है

हर गम भूल जाये वो शख्स
जिसने तेरा मुस्कुराना देखा है

Hindi Shero Shayari 2020

शायद जी उसका भर गया होगा
यूँ ही तो न बात से मुकर गया होगा

गुलों के झुके हुए सर बता रहे मुझे
इसी रास्ते से ही वो गुजर गया होगा

नोचा होगा खुद को रोया होगा बहुत
जो जहन से मेरा मंजर गया होगा

याद तो आया होगा इक दफा तो मैं
जब वो मोहब्बत के नजर गया होगा

न उठती कसक याद में न हिज्र बहते हैं
लगता 'साहील' दिल अपना मर गया होगा

तेरे आंचल से रिश्ता मेरा ता उम्र रहे
मेरे लबों पे आपकी हंसी का हुनर रहे

मिलना ना मिलना तो मुकद्दर की बात
मगर कम से कम दिल में इक सब्र रहे

ये तन्हाई का रोना गम की जुस्तजू क्या
आप ना वाकिफ़ हो न कभी ऐसा हश्र रहे

Shero Shayari in Hindi 2020

शायर के हसीन खयाल सा लग रहा होगा
मैं जानता के वो गुलाब सा लग रहा होगा

आँखो में काजल, वो खुली ज़ुल्फ़ का कहर
ना बता धुप में वो इक घटा सा लग रहा होगा

लफ्ज़ जैसे शहद, आवाज एक मधुर नग्मा
सोचने बाद उसे कहीं देखा लग रहा होगा

उसके नाम को तू बात बात पे ना दोहरा, वो
शायर के ग़ज़ल में पढ़ा सा लग रहा होगा

दहल के उठ जाते हैं ख्वाब
निंद मेरी कच्ची सी रहती है
जब से मिला हूं तुमसे दोस्त
तबियत अच्छी सी रहती है
बिखरी ज़ुल्फ़ें न काजल के
वो भी न बच्ची सी रहती है
पर ,मगर, की न होती जगह के
बातें वो ही सच्ची सी रहती हैं

 

 

वहशत-ए-दिलनेकहीं का भी न रक्खा मुझ को
देखना है अभी क्या कहती है दुनिया मुझ को
 
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असर-ए-क़ैद-ए-तअ’य्युन से भी आज़ाद है दिल
किस तरह बंद-ए-अलाएक़ हो गवारा मुझ को
 
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लेने भी दे अभी मौज लब-ए-साहिल के मज़े
क्यूँ डुबोती है उभरने की तमन्ना मुझ को
 
 
ख़्वाहिश-ए-दिल थी कि मिलता कहीं सौदा-ए-जुनूँ
मैं ने क्या माँगा था क़िस्मत ने दिया क्या मुझ को
 
तेरी बे-पर्दगी-ए-हुस्न ने आँखें खोलीं
तंग-दामानी-ए-नज़्ज़ारा थी पर्दा मुझ को
 
आख़िरी दौर में मदहोश हुआ था लेकिन
लग़्ज़िश-ए-पा ने मिरी ख़ूब सँभाला मुझ को
 
उम्र सारी तो कटी दैर-ओ-हरम में ऐ ‘शौक़’
इस पे सज्दा भी तो करना नहीं आया मुझ को
 

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मैं तुझ से लाख बिछड़ कर यहाँ वहाँ जाता

मिरी जबीन से सज्दों का कब निशाँ जाता

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ज़मीन मुझ को समझती आसमाँ कोई

गुनाहगार ही कहलाता मैं जहाँ जाता

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नसीब से तो मिले थे फ़क़त ये ख़ाली हाथ

फ़राख़-दिल वो होता तो मैं कहाँ जाता

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मुझे ख़बर थी इस घर में कितने कमरे हैं

मैं कैसे ले के वहाँ सारी दास्ताँ जाता

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मैं एक गूँज की मानिंद लौटता उस तक

जहाँ से मुझ को बुलाता मैं बस वहाँ जाता

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Attitude Shayari in Hindi | Attitude Status in Hindi

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ज़माने से तेरी शख़्सियत को रूबरू करवा सकता हूँ
मुसव्विर तो नहीं हूँ फिर भी तेरी तस्वीर बना सकता हूँ
(मुसव्विर - painter, photographer, sculpture)

तुम्हें ही लड़ना होगा अपने हक़ के लिए यहाँ सब से
मैं तो ज्यादा से ज्यादा उम्मीद का दिया जला सकता हूँ

मेरे दुश्मनों को भी है खबर के अपनी पे आ जाऊं तो
मिस्मार कर के मैं उन्हें उन्हीं का मलबा बना सकता हूँ
(मिस्मार - demolished, razed, ruined, तबाह)
(मलबा - debris, refuse, garbage)

तू बस इशारा भर तो कर मुझे कभी मेरे साथ होने का
तेरी सुलगती हसरतों को अपने दिल में भड़का सकता हूँ

तुम्हें जिस ज़माने से है डर मैं उसी से खेला हूँ कई मर्तबा
वो इक राह रोक भी लें तो मैं कई रास्ते बना सकता हूँ

An Urdu poet from Nasik, India
Sagar Rajput
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Ghazal Shayari | Wo Baateein Jo Kisi Se Na Kahi

वो बातें जो किसी से ना कही वो करना चाहता हूँ
मैं तेरा बस एक ख्वाब हक़ीक़त में जीना चाहता हूँ

ये हर पल की मिन्नतों से ऊब गया है अब दिल मेरा
बस इक शाम को कहीं तेरे साथ बैठना चाहता हूँ

जैसे बहारों के आने पे फूलों के लब मुस्कुराते हैं ना
कुछ इस कदर मैं तेरी जिंदगी को देखना चाहता हूँ

मेरा दुनिया से नहीं बस उस से है वास्ता "साहील"
मैं दुनिया की नहीं उसकी नज़र में रहना चाहता हूं

An Urdu poet from Nasik, India
Sagar Rajput
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Urdu Poetry in Hindi Font | Urdu Ghazal Shayari

सहारे तेरी याद के कहाँ तक सफर चलूँ
कब तलक साथ ये बैसाखी ले कर चलूँ

वो ज़हन में इस कदर महक रहा है मेरे
आए खुशबू उसकी जिस भी रहगुज़र चलूँ

ये राह तहज़ीब की बेबसी दे जाती है क्यूँ
मैं शरीफों के मोहल्ले से भी डर डर चलूँ

आ कर उसके शहर में सोचता हूँ "साहिल"
रुकूँ भी पल भर को या फिर गुज़र चलूँ

An Urdu poet from Nasik, India
Sagar Rajput
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Sad Shayari in Hindi | Ghazal

अपनी खुशी को खुद ही मैं खाया हूँ
मैं और कुछ नहीं वक़्त बस जाया हूँ

खाली जेब में आ गिरे पल सुकून के
यादों की गली में जब चला आया हूँ

मैंने भी चाहा तो था संभलना लेकिन
मैं राह की ठोकरों को बड़ा भाया हूँ

जो दिल के जख्मों को छेड़े वही साज़
मैं भी गीत अक्सर वही गुनगुनाया हूँ

अब भी ना आई मुझको मौत 'साहील'
मैं आग का दरिया भी पार कर आया हूँ

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Sagar Rajput
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Tere Zikr Ke Siva Na Koi Baat Ki Maine | Ghazal Shayari

एक तेरी खातिर ख्वाहिशें तमाम की मैंने
तेरे जिक्र के सिवा कोई ना बात की मैंने

तू ढलता रहा शाम सा हर वक़्त जहन में
तेरे जाने से खुशियां सारी निज़ाद की मैंने

हर शै हर कतरा मेरे लहू का तेरे लिए
एक उम्र तेरे लिये रात से विसाल की मैंने

कभी कभी का ही था ये इश्क़ उसका तो
जोड़ रिश्ता उससे जिंदगी फसाद की मैंने

हो जायेंगे इतने बेदर्द ये सोचा ना था कभी
जिसकी गली मैं जिंदगी की शाम की मैंने

बहने लगा मेरे पैरों से लहू तेरे इंतज़ार में
एक तुझसे दूर जाने की क्या बात की मैंनें

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Meri Raah Se Guzrna Mushkil Hai | Ghazal Shayari

रस्मों रिवाज़ ही मैं तोड़ता आया हूँ
दिल को भाये वही करता आया हूँ

इक बाग की ख्वाहिश में गुलाब की
राह में पत्तियाँ ही बिखेरता आया हूँ

जिंदा वजूद अपना, उसके जहन में
कस्तूरी सा उसमें महकता आया हूँ

मेरी राह से गुजरना मुश्किल है के
पांव के छालों को फोड़ता आया हूँ

याद नहीं रखोगे तो भुलोगे भी नहीं
के मैं दिल ही में सिमटता आया हूं

अब के मूमकिन हो गजल 'साहील'
उसके ख्वाब से गुजरता आया हूं

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Sagar Rajput
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तुझसे ज्यादा किसी का हुआ नहीं हूँ मैं | Ghazal Shayari

इक वादा अब तलक तोडा नहीं हूँ मैं
तुझसे ज्यादा किसी का हुआ नहीं हूँ मैं

वो सामने हो मेरे और मैं देखूँ ना उसे
बुरा तो हूँ मगर इतना भी बुरा नहीं हूँ मैं

तेरी मर्ज़ी के साथ मेरी रज़ा भी तो हो
तू चाहे और मिलूं ऐसी दुआ नहीं हूँ मैं

हम जैसे मुसाफिरों की बात ना पूछो
इक पल भी चैन से खड़ा रहा नहीं हूँ मैं

अब भी बचे हैं कुछ रकीब जो जानते हैं
तू दे और खाऊँ ऐसा धोका नहीं हूँ मैं



An Urdu poet from Nasik, India
Sagar Rajput
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आने लगी उसके जिक्र भर से हसीं लबों पे

Ghazal Shayari | Latest Romantic Shayari

ऐ दिल तू किसी की बातों में आ गया
वो तो जहन में था इबादतों में आ गया

झूठी तारीफ ना महबूब के हक जो हुई
वो आफरीन तो पाक आयतों में आ गया

अब के जाती नहीं उस तक सदायें कोई
वो मौत सा जिंदगी की मिन्नतों में आ गया

आने लगी उसके जिक्र भर से हसीं लबों पे
'साहील' तू किसी की मोहब्बतों में आ गया