Category Archives: LOVE STORIES

Follow Me :)
Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
Follow Me :)
Short Love Stories in Hindi, Sad, True & Emotional, लव स्टोरी इन हिंदी, kissa

Emotional Love Story in Hindi: हिंदुस्तान अब पूरी तरह से मेरे दिल में बस चूका था। कैलाश से उतरते वक़्त यही सोचती रही के अल्बर्ट के साथ आउंगी यहाँ कभी। अपने आप में इतना खो गयी थी के पता ही नहीं चला के कब बोरिस और अनस्तास्या से मैं बिछड़ भी गयी।

किस्सा

अल्बर्ट ने शादी का प्रस्ताव रखा तो मैं बेहद खुश हुई। काफी समय से मैं उसे जानती थी और मुझे बेहद पसंद भी था। डैड के ही बिज़नेस पार्टनर का बेटा  था तो एक-दूसरे के घर पे भी आना जाना लगा रहता था।

कुछ ही दिनों में हमारी सगाई हो गयी और इससे पहले के शादी की तारीख रखी जाती, मैंने अल्बर्ट से कहा, "मैं चाहती हूँ के मैं और तुम कहीं घूमने चलें। बीवी बन कर घूमने के तो काफी अवसर आयेंगे फिर जीवन में, पर मैं चाहती हूँ के किसी लम्भे सफर पे एक बार तुम्हारी मंगेतर, तुम्हारी प्रेयसी बन कर भी चलूँ।"

"तो फिर तुम ही बताओ के कहाँ चलना चाहती हो? जहाँ तुम कहोगी, वहीं चलेंगे।" अल्बर्ट मुझे कभी मना नहीं करता था। उस समय भी नहीं किया जब मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ इंडिया जाना चाहती थी। "अपना ख्याल रखना। किसी चीज़ की जरुरत हो तो मुझे बताना।" बस इतना कह कर उसने मेरा माथा चुम लिया और मैं इंडिया आ गयी।

मुंबई, गोवा, दिल्ली काफी जगह घूमे-फिरे हम। ऐसा लगने लगा था के इंडिया अपना ही वतन हो जैसे। बड़ा स्नेह मिला सबसे। लालकिले पे एक यूट्यूबर के साथ मिलकर वीडियो भी शूट की। ताज़महल को तो बस मैं देखती ही रह गयी थी। और काफी देर तक यही सोचती रही के अल्बर्ट भी मेरे लिए कभी ऐसा ही कुछ बनाये।

कुछ लोगों का समूह देखा। पूछा तो पता चला के श्रदालु हैं और मणिमहेश की तरफ जा रहे थे। थोड़ी और उत्सुकता बड़ी तो इंटरनेट पे सर्च किया। तस्वीरों में ही चौरासी मंदिर और मणिमहेश झील ने मन को मोह लिया था। हम सब भी अगले दिन सुबह उठते ही मणिमहेश के लिए चल दिए। काफी थकावट भरा सफर था। पर लोगों के उत्साह और उनके आराध्य महादेव के दर्शन की लगन को देखते हुए थकावट ज्यादा महसूस नहीं हुई। तस्वीरों में जितना देखा था उससे भी कहीं ज्यादा सूंदर था कैलाश।

हिंदुस्तान अब पूरी तरह से मेरे दिल में बस चूका था। कैलाश से उतरते वक़्त यही सोचती रही के अल्बर्ट के साथ आउंगी यहाँ कभी। अपने आप में इतना खो गयी थी के पता ही नहीं चला के कब बोरिस और अनस्तास्या से मैं बिछड़ भी गयी। काफी दूर तक जा कर देखा तो वो कहीं नहीं थे। कभी लगता के वो आगे निकल गए हैं तो कभी लगता के कहीं पीछे तो नहीं छूट गए। बेहद परेशान हो गयी थी मैं। एक किनारे पे बैठ कर मैं उनका इंतज़ार करने लगी। इससे पहले के रोना शुरू करती, मुझे उदास बैठा देख कर किसी ने पूछ ही लिया, "तुम ठीक तो हो ना?"

नज़रें उठा कर देखा तो सामने ५'-९" का एक हैंडसम खड़ा था। कैलाश की ओर जा रहा था। "मैं अपने दोस्तों से बिछड़ गयी हूँ। पता नहीं वो कहाँ हैं और फ़ोन भी काम नहीं कर रहा यहाँ पर।"

"ये इलाका कवरेज क्षेत्र से बाहर आता है। इसी बजह से मोबाइल में सिग्नल नहीं होता।" उसने बड़ी ही संजीदगी के साथ कहा। मैं अपने माथे पे हाथ रख के बैठी रही।

"आप अभी कैलाश जा रहे हो या..."

"वापिस और आप?" मैंने भी औपचारिकता में पूछ लिया।

"मैं अभी कैलाश की ओर ही जा रहा हूँ। पर मैंने आते वक़्त २ रुस्सियन कपल को देखा था। कहीं वो आपके दोस्त तो नहीं?" मेरे होंठों पर एक ख़ुशी की लहर दौड़ गयी।

"वो उम्र में २५ और २२ के हैं और लड़के की पीठ पे एक खाकी रंग का बैग भी है।" मैंने बड़ी उत्सुकता से उसकी तरफ देखते हुए कहा।

"उम्र में तो इतने के ही लगते थे पर बैग की और ध्यान नहीं दिया मैंने। करीब ३ कि० मि० निचे की ओर ही जाते देखा उन्हें।" मैं उसे शुक्रिया कह कर वहां से जाने लगी तो उसने फिर आवाज़ दी, "रुको! कहीं आप फिर से ना भटक जाओ तो आओ मैं ही आपको छोड़ देता हूँ।" उसने कहा और मैं ना भी नहीं कह सकी। मुझे उस समय उसका साथ आना ही सही लगा।

रास्ते में आते वक़्त वो बातें किये जा रहा था। शुरू में थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था पर जब एक दूसरे को जानना शुरू किया तो फिर अच्छा भी लगने लगा। उसने जब नाम पूछा तो मैंने बताया, "जाशा पैट्रोवा, रूस से। अभी - अभी ग्रेजुएशन कम्पलीट की है। दोस्तों के साथ ट्रिप पे आई थी इंडिया। पर अब जैसा के आप जानते हैं मैं उनसे बिछड़ चुकी हूँ।" वो ज़ोर से हंसा। मुझे बड़ा अजीब लगा तो मैंने कारण भी पूछ लिया इस तरह से हंसने का, "दरसल अगर यही सब किसी इंडियन के साथ होता तो वो यही कहता के मेरे दोस्त बिछड़ गए हैं। पता नहीं कहाँ चले गए हैं...”

उसकी बातें सुन कर मुझे भी हंसी आ गयी। मैंने रोकना तो बेहद चाहा पर रोक नहीं पाई। अपने बारे में भी कुछ बताइये। मैंने फिर से औपचारिकता में पूछ लिया। "विहान वसु नाम है और स्टोरी राइटर हूँ।" मैं उससे काफी प्रभावित हो रही थी। "तो आप क्या - क्या लिख चुके हो अब तक?" और जानने की उत्सुकता में मैंने पूछ ही लिया। "लिखा तो काफी मुद्दों पर है पर प्रेम पे लगभग १५० से ज्यादा कहानियां लिख चूका हूँ और जिस में १२८ तक प्रकाशित भी हो चुकी हैं।" उसकी आँखें मुझे घूरे जा रही थीं। ऐसा लगा के मुझ में भी वो किसी कहानी को खोज रहा था।

मैं थक चुकी थी। अब और चलना मेरे बस में नहीं था। "अगर आप चाहें तो थोड़ी देर आराम कर सकते हैं।" उसने एक पानी के झरने की तरफ देखते हुए कहा। मुझे वहां बैठा कर वो कहीं चला गया। जब वापिस आया तो हाथों में २ चाय के कप थे। इससे पहले के मैं चाय का एक सिप भी लेती कप मेरे हाथों से फिसल गया। "कोई बात नहीं। आप ये वाली ले लीजिये।" उसने अपना कप मेरे हाथ में थमाते हुए कहा। "और आप ?" इस बार मैंने मन से पूछा, औपचारिकता नहीं की।

"अब क्या कर सकते हैं? पर आप चाहो तो अंत में थोड़ी सी दे सकते हो।" इस बार उसके कहने में शरारत थी। मैं भी मुस्कुरा दी। चाय का एक सिप में लेती तो एक वो। मुझे भी लगने लगा था के इस वक़्त मैं इस लेखक की कहानी की एक नायिका हूँ।

कुछ दूर और चले तो देखा के बोरिस और अनस्तास्या मेरा इंतज़ार कर रहे थे। वो मुझ पे काफी चिल्लाये और फिर अनस्तास्या ने वसु को शुक्रिया कहते हुए कहा, "आप सच में एक अच्छे इंसान हो। आप तो खुद ही इसे लेकर आ गए।" बोरिस और अनस्तास्या को मैंने आगे चलने के लिए कहा और वसु को हैरान हो कर देखती रही।

"तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया के तुम मेरे दोस्तों से मिले थे?" वो हल्का सा मुस्कुराया।

"तुम्हारे साथ फिर इस तरह से यहाँ तक नहीं आ पाता। मेरा मानना है के छोटी-छोटी वार्तालापों में से किसी कहानी का सिर्जन हो सकता है।"

"तो क्या तुम्हें तुम्हारी कहानी मिली?" अंतिम विदा लेने के लिए मैंने उसका हाथ थामते हुए कहा।

"तुमसे दुरी ही तय कर सकती है के तुमने मुझ पे कितना प्रभाव डाला है। कहानी का जन्म हो चूका है और तुम्हारे विछोह ने मुझे अगर जरा सा भी तड़पाया तो मेरी कहानी पूरी हो जाएगी।" उसकी बातों ने मुझे काफी भावुक कर दिया था। मैं नहीं जानती के उसकी कहानी पूरी हुई या नहीं। लेकिन एक विदाई चुंबन के साथ मैं उसके होंठों से विदा लेकर अपने वतन लौट आई।

मैं अतीत में खोयी हुई थी, "तो फिर कहाँ जाने का तुमने सोचा है ?" अल्बर्ट ने बाहें मेरे गले डालते हुए पूछा।

"यहाँ के सबसे अच्छे रेस्तरां में। जो तुम्हें पसंद हो।" कहीं और जाने की इच्छा नहीं हुई। मैं वसु का किस्सा बन चुकी थी और अब बस अल्बर्ट का हिस्सा बनना चाहती थी।

Follow Me :)
Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
Follow Me :)
Short Love Stories in Hindi, Sad, True & Emotional, लव स्टोरी इन हिंदी

Cute Love Story : ताका-झाँकी में कब तुमसे प्रेम भी हो गया खबर भी नहीं हुई। कई बार कहना चाहा था मैंने तुमसे पर कह नहीं पाया। एक रोज़ तुम्हें फ़ोन भी किया था मैंने पर तुम्हारी आवाज़ सुनने के बाद कुछ कह नहीं सका और फिर से तुम्हें फ़ोन करने की मेरी हिम्मत नहीं हुई।

अलका

जब तुम्हें पहली बार देखा था तभी कुछ - कुछ एहसास हो गया था मुझे के तुमसे वास्ता पल दो पल के लिए नहीं सालों का रहने वाला है। यूँ तो हम स्कूल में सिर्फ २ बर्ष ही साथ रहे थे लेकिन अगले कई बर्षों तक मेरे मन पर तुम्हारा अधिकार रहा था।

मैंने तुम्हें अक्सर सिर्फ स्कूल की यूनिफार्म में ही देखा। हरे रंग की कमीज के साथ सफ़ेद रंग की सलवार और उस पर सफ़ेद रंग का दुपट्टा। इतनी सादगी में भी तुम्हारे रूप का कोई सानी नहीं था। शुरू - शुरू में तुम मुझे बस अच्छी लगती थी क्यूंकि आँख भर देखने में भी तो वक़्त लगता है। लेकिन आँख भर कर देखने का वक़्त ही कहाँ था हमारे पास। मैं कॉमर्स का छात्र और तुम आर्ट्स की छात्रा। हमारा मेल होता भी तो बस इंग्लिश की पहली क्लास में। और उस पर भी ब्रजेश सर का पहरा। फिर तुम आर्ट्स की क्लासेज के लिए चली जाती और मैं बिच - बिच में खिड़की से झांक कर तुम्हें देखा करता।

ताका-झाँकी में कब तुमसे प्रेम भी हो गया खबर भी नहीं हुई। कई बार कहना चाहा था मैंने तुमसे पर कह नहीं पाया। एक रोज़ तुम्हें फ़ोन भी किया था मैंने पर तुम्हारी आवाज़ सुनने के बाद कुछ कह नहीं सका और फिर से तुम्हें फ़ोन करने की मेरी हिम्मत नहीं हुई।

तुम्हें अगर याद हो तो एक ही क्लास में होने पर भी २ बर्षों में हम सिर्फ एक ही बार बात कर सके थे। वो भी तुमने ही मुझे पुकारा था जब बर्जेश सर ने इंग्लिश के पेपर मेरे पास दिए थे जो नहीं आये थे उन्हें अगले दिन देने के लिए। तुम्हारी भी एक सहेली नहीं आई थी और तुमने जब मुझे मेरे नाम से पुकारा तो सच पूछो तो उसकी गूंज आज तक मेरे कानों से जाती नहीं है। तुमने मुझसे अपनी सहेली का पेपर माँगा और मेरे पास जो थे और जो बाकि लड़कों के पास थे वो भी सब लेकर मैंने तुम्हारे आगे ढ़ेर लगा दिया था। तुम मुस्कुराई तो बहुत थी पर मैं बाद में अपने किये पे काफी शर्मिंदा हुआ।

तुम्हारे लिए मेरा वो पवित्र प्रेम मेरी आँखों से झलकता भी था। और इसकी बातें सिर्फ हमारी क्लास में ही नहीं, पुरे शहर भर में होती थीं। मेरे साथ तुम औरों के मुक़ाबले में बेहद नरम रही। जब कोई तुम्हें बार - बार देखता था तो तुम उसे अक्सर ये कह कर धमकाया करती थी के "मामा को बुला लुंगी।" पर मेरे साथ तुमने ऐसा कभी नहीं किया। मेरी हर हरकत पे तुम मंद मंद मुस्कुरा देती थी। एक बार जब क्लास में मैं अपनी ही धुन में बैठा था तो दीवार पे ऊँगली से तुम्हारा नाम लिखने लगा। आरती के देखते ही मैं रुक गया और उसने जब तुम्हें बताया तो तुमने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर मुस्कुरा कर कहा, लिखने दे। मेरे लिए तुम्हारी इस दरियादिली के बाबजूद भी मैं तुमसे अपने मन की बात नहीं कह सका।

जब मुझे पता चला था के तुम्हारे पापा नहीं हैं तो मुझे बेहद दुःख हुआ। पर ये जान कर ख़ुशी भी हुई के तुम्हारे और मेरे पापा का नाम एक सा ही है। मुझे लगा के जब तुम हमारे परिवार में आओगी तब तुम्हारी ये कमी भी पूरी हो जाएगी। पर जब किसी से पता चलता के तुम किसी और को चाहती हो तो मन उचट सा जाता और जिस कारण मैंने स्कूल में आना भी छोड़ दिया था। हफ्तों स्कूल से गायब रहता था मैं।

मेरे दोस्तों ने कई बार मुझसे कहा के तुमसे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ लेकिन मैं उन्हें हमेशा यही कह कर टाल देता था, "वो ये तो जानती है के मैं उससे प्यार करता हूँ लेकिन कहीं अगर उसने ये पूछ लिया के कितना तो?" और किस हद तक मैं तुमसे प्यार करता था ये तो मैं भी नहीं जानता था।

मैं तुम्हारे साथ उम्र भर जीना चाहता था लेकिन कुछ पल भी मिल जाएं बात जहाँ तक आ गयी थी। तुम्हें पता है तुम पर सब लड़के मरते थे पर मेरे लिए अंत में सब पीछे हट गए थे। मनोज ने कहा भी था के तुमसे ज्यादा प्यार उसे कोई नहीं कर सकता। और अगर वो हम में से किसी को हाँ भी कर दे तो भी हम पीछे हट जायेंगे।

लड़कों के कहने पे भारती ने तुमसे पूछा भी था मेरे बारे में पर तुमने इंकार कर दिया। मैं जानता था के तुम ऐसा ही करोगी पर वो लोग नहीं माने। सच कहूं तो मैंने बस यही चाहा था के जब अपने पैरों पे खड़ा हो जाऊंगा तब तुम्हारे घर पे आकर तुम्हारा हाथ मागूंगा।

स्कूल के बाद तुमने यहीं पर कॉलेज में दाखिला ले लिया और मैं एक बर्ष के लिए दिल्ली और उसके बाद जलंदर चला गया। इस बिच मैंने तुमसे मिलने की कई बार कोशिश की। लेकिन किस्मत में शायद तुमसे दूर दूर की केवल एक ही भेंट लिखी थी। लगभग २ सालों बाद जब तुम्हें देखा तो तुम हलकी सी मोटी लग रही थी। तुम्हें इस रूप में देख कर मेरे मन को काफी सकून मिला। डैडी साथ थे इस बजह से मैं एक दीवार के पीछे छिप गया था। नहीं तो वो तुमसे मेरे दिल की बात कह ही देते। तुम शर्मिंदा होती इसी बजह से मैंने तुम्हारे सामने आना उचित नहीं समझा।

जब तुम्हारी शादी कहीं और तय हो गयी थी तो मैंने बेहद कोशिश की थी उसे रुकवाने के लिए। मैं तुम्हारे मंगेतर से भिड़ने तक को तैयार था और मैं चाहता था के जो हम दोनों में से बचता वो तुमसे शादी करता। लेकिन माँ और दादी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने मुझे ये कह कर समझाया के जैसे तुम हमारे लिए हो वैसे वो भी तो आखिर किसी का बेटा है और क्या पता कहीं अलका ही उसे चाहती हो। उसे जब पता चलेगा के तुमने ऐसा किया है क्या तब वो तुम्हारे प्रेम को स्वीकार लेगी?

मेरे पास कोई जवाब नहीं था। मैं मन से तुम्हें अब हार चूका था। तुम्हारी शादी को जब कुछ ही दिन बचे थे तब मुझे एक लड़का मिला। वही जिसे हम सब डाकू कह कर बुलाते थे। उसने बहुत सी बातें की तुम्हारे बारे में। उसने कहा, "मैं अलका से मिला था और उससे ये भी कहा के एक लड़के के साथ तुमने अच्छी नहीं की। बहुत प्यार करता था वो तुम्हें।"

एक लम्भी सांस भरते हुए उसने फिर कहना शुरू किया, "भाई! मैंने तेरा नाम भी नहीं लिया उससे। उसने खुद ही कहा के तुम सन्नी की बात कर रहे हो न? उससे कहना के कभी खुद कहा मुझसे। खुद कहता तो मैं कुछ सोचती भी। पर अब बहुत देर हो चुकी है। एक लड़की ऐसे ही ऐसी बात नहीं करती वो तुम्हें कहीं न कहीं चाहती थी। तुम्हें खुद कहना चाहिए था एक बार।"

वो कहता रहा लेकिन मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी थी। मैं तुमसे लिपट के जी भर के रोना चाहता था उस दिन। कई बर्षों तक अधिकार रहा तुम्हारा मेरे मन पर। मैं सबसे क्या अपने आप से भी कटा रहा।

Follow Me :)
Sunny Singh is a poet, author and publisher. He lives in Jawali city of India, and he has written various poems (Gazal and Nazm) in Hindi and Urdu language. He is a very creative person and after listening to his poems, fans forced to him to write stories or novels. So, from there, he tried his hand at writing.
Follow Me :)
Ismala, love story in hindi, short stories hindi kahaniyan

Ismala - गुलाब के फूल उसे बेहद पसंद थे। एक शाम को वो अपनी सहेलियों के साथ खड़ी थी और जैसे ही मैं पहुंचा उसने एक गुलाब बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में मेरी तरफ बढ़ाया। मैं हालांकि शुरू से थोड़ा शर्मीला रहा हूँ पर फिर भी मैंने वो गुलाब उससे ले लिया।

इस्माला

बर्ष 2000 में डैडी का तबादला बिहार के मोकामाघाट में हुआ। CRPF का ग्रुप सेंटर होने के कारण लगभग सबको फ़ैमिली क्वार्टर्स मिले हुए थे। जब डैडी हमें वहां लेकर गए तब मैं महज़ 12 बर्ष का था और मेरा भाई 11 का। हम दोनों की उम्र में साढ़े 14 महीने का अंतर था। बहुत भाग दौड़ करने से CRPF के केंद्रीय विधालय में 7th (A) में दाख़िला भी मिल गया। और फिर धीरे - धीरे कुछ दोस्त भी बनने शुरू हुए। दाख़िला हमें कुछ देरी से मिला था तो सिलेबस बहुत पीछे छूट चूका था और हमारे दाखिले के एक माह के बितर ही 3 माही परीक्षाएं शुरू हो गईं।
इस्माला से मेरी दोस्ती भी इसी दौरान हुई थी। मैथ की परीक्षा में हम दोनों साथ ही बैठे थे। और मैंने कुछ प्रश्नों को हल करने में उसकी मदद की। पर विपरीत इसके उसने मेरे एक प्रश्न का गलत उत्तर निकालने में मेरी मदद की। मैं और इस्माला 4 अंकों से परीक्षा में असफल हो गए थे।
साहू सर के पास जो स्टूडेंट्स ट्यूशन पढ़ते थे उन में से भी सिर्फ २ लोग ही पास हो सके थे। और ये देख कर साहू सर काफी बौखलाए हुए थे। अंत में उन्होंने झुंझलाकर कहा, "24 नहीं तो जिसके 20 भी नंबर आये हैं वो खड़ा हो जाए।"
तब मेरे और इस्माला के सिवा २-३ और भी खड़े हो गए। मुझे देखकर सर काफी खुश हुए और कहा, "इन सबसे तो अच्छे तुम हो जो अभी 1 महीने के अंदर ही ऐसा रिजल्ट ले आये। ढ़ाई महीने से इन्हें पढ़ा रहा हूँ तब जा कर ये हाल है इनका।"
क्लास के बाद इस्माला मेरे पास आयी और कहने लगी, "मेरी वजह से तुम पास होने से रह गए, तुम सॉल्व सही कर रहे थे मुझे ही इन्टर्-फ़िअर् नहीं करना चाहिए था।"
इसके बाद से हमारे बिच काफी बातें होने लगीं। और पता ही नहीं चला के कब मैं उसका बेस्ट फ्रेंड भी बन गया था। एक दिन उसने एक लेटर मुझे थमाया और 7th बी में पढ़ने वाले एक ललन नाम के लड़के को देने के लिए कहा। मैंने भी बिना कुछ पूछे वो लेटर जा कर उस लड़के को दे दिया। जब वापिस आया तो सब लड़कियों ने मुझे घेर लिया और तरह - तरह की बातें करने लगीं - "तुम्हें पता भी है उस में क्या लिखा था?", "वो उसने उसे देने के लिए क्यों कहा?"
मैं बस इतना ही कह सका के शायद वो एक दूसरे से प्रेम करते हैं और मैं ऐसे लोगों की मदद करने से पीछे भी नहीं हट सकता।
मेरे भाई के जरिये एक दिन बात डैडी तक भी पहुँच गयी। और उसके बाद मम्मी और डैडी ने मिलकर काफी देर मेरी क्लास ली। प्रेम बचपन से मेरी रगों में बहता आया है और फिर चाहे वो किसी भी रूप में क्यों ना हो। मम्मी ने नाम पूछा तो मैंने इस्माला बता दिया। "नाम से तो मुस्लिम लगती है।", "डैडी ने कहा।
"तो?" मैंने भी भौहैं चढ़ा कर प्रश्न किया।
"वो लड़का भाग भुग गया तो इसके गले में पड़ जाएगी वो लड़की।" मम्मी को ताना मारते हुए कहा। "देखो ये बिहार है यहाँ रातों - रात उठवा कर शादी करवा देते हैं। फ़ैमिली बैकग्राउंड अच्छा हो बस यही देखते हैं।"
12 बर्ष की उम्र में दोस्ती और प्रेम के लिए मिट जाने के उस जज़्बे को मैं आज भी सलाम करता हूँ। "दोस्त है मेरी और अगर ऐसी नौबत आ भी गयी तो मैं कर लूंगा उससे शादी।" ये सुनने के बाद डैडी के पास कहने को कुछ नहीं था। पर मम्मी काफी देर तक समझाती रही।
वक़्त के साथ मेरी और इस्माला की दोस्ती और भी गहरी होती गयी। लंच में कभी भी मुझे बाकि लड़कों के साथ बाहर नहीं जाने देती थी। जब भी जाने लगता अपनी बाहें मेरे गले में डाल कर मुझे रोक लेती और अपने साथ बिठा कर लंच करवाती। हम ट्यूशन भी साथ साथ जाते थे। वहां ललन भी होता था।
गुलाब के फूल उसे बेहद पसंद थे। एक शाम को वो अपनी सहेलियों के साथ खड़ी थी और जैसे ही मैं पहुंचा उसने एक गुलाब बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में मेरी तरफ बढ़ाया। मैं हालांकि शुरू से थोड़ा शर्मीला रहा हूँ पर फिर भी मैंने वो गुलाब उससे ले लिया। हालाँकि बाद में लड़कियों ने उसे ये कह कर कुछ परेशान किया भी था के तुमने उसे ये फूल क्यों दिया। ये तो उसे दिया जाता है जिससे प्यार हो।
"हाँ तो? मुझे इससे प्यार नहीं है क्या? ये मेरे लिए सबसे ख़ास है। इसकी जगह सबसे ऊपर है और कोई नहीं ले सकता।"
इस्माला के साथ जितना भी वक़्त मिला मुझे मैंने उसे भरपूर जिया। लेकिन किस्मत को ना जाने क्या मंजूर था। 7th में हमारे सेक्शन से कुल 7 से 8 लोग ही पास हो सके थे। और उन में मेरा और इस्माला का नाम नहीं था। जिस विषय में सबसे सही था मैं उसी विषय में कैसे रह गया ये देख कर सब हैरान थे। इंग्लिश वाले के साथ जिस तरह का व्यवहार रहा था हमारा उसी की खुंदस निकाल ली आखिर में। मम्मी आयी थी रिजल्ट सुनने के लिए। इस्माला और कुछ और लड़कियां उनसे बात कर रही थीं, "आंटी अगर सन्नी रह गया तो हमारा सबका क्या होगा ?" जो हुआ मुझे उसका कोई अफ़सोस नहीं था बल्कि इस बात की ख़ुशी थी की मम्मी इस्माला से मिली। बाद में मम्मी ने पूछा भी था के उस लड़की का क्या नाम था जो घुंघराले बालों वाली थी।मैंने कुछ नहीं कहा बस इतना ही परिचय काफी था उनके लिए मेरी इस्माला का।
डैडी ने काफी कोशिश की पेपर रीचेक करवाने के लिए। पर मैं अगर किसी तरह पास हो भी जाता तो फिर भी इस्माला पीछे छूट जाती। चाहे असफल हो गया था मैं सबकी नज़र में पर मेरा मन ही जानता था के अपने साथ क्या ले जा रहा हूँ मैं। कुछ ऐसी यादें जिनका कोई मोल नहीं। इक ऐसा दोस्त जो मेरी समृतियों में हमेशा रहेगा।
मैंने वो स्कूल छोड़ दिया और गंगा किनारे बने एक सरकारी स्कूल में दाखिला ले लिया। मन बहुत उदास था और शांत करने के लिए इससे बेहतर जगह और कोई नहीं लगी। 10th उसी स्कूल से की मैंने। इन 3 बर्षों में मैं कभी इस्माला से नहीं मिल पाया। कभी - कभी ललन से मुलाक़ात होती थी। वो अक्सर यही कहता था के इस्माला तुम्हें बहुत याद करती है। कभी मिल लो उससे। और मैं हमेशा बस यही कहता, "कोशिश करूँगा कभी पर तुम उसके साथ रहना।"
दादा-दादी ने भी डैडी पे दबाब डालना शुरू कर दिया था हम सबको घर पे छोड़ने का। जिस कारण मुझे हिमाचल आना पड़ा। आगे की पढाई अब यहीं से करनी थी। पर मन कहीं पीछे भागा जा रहा था। कुछ अधूरा रह गया है अब भी मन बार-बार यही कहे जा रहा था। बहुत सोच-विचार के बाद मैंने फिर जिद्द की के मुझे वापिस बिहार ही जाना है। और मेरी जिद्द के कारण डैडी एक बार फिर हमें बिहार ले गए।
वहां पहुंचा तो पता चला के ललन 10th में फेल हो गया था और उसने खुदखुशी कर ली। मैं समझ सकता था उसके ऐसा करने के पीछे की बजह को। प्रेम के रस्ते सरल तो नहीं। बहुत दबाब था उस पर भी उसके घर वालों का। एक बार उसका लेटर जब इंग्लिश की ट्यूशन क्लास में मैडम के हाथ आ गया था तो बहुत बुरी तरह उसकी पिटाई की थी मैडम ने। और अगले दिन उसके पापा को बुला कर सब बताया गया। उन्होंने भी सबके सामने बहुत पीटा था उसे। और उस पर अब 10th में फेल होने के कारण सब रस्ते बंद होते दिखे होंगे उसे।
इस्माला को मेरी जरुरत थी। लेकिन मैं उसका सामना करने की हिम्मत ही नहीं जुटा सका। ललन के साथ उसकी प्रेम कहानी का जो हश्र हुआ, वही हश्र किसी दिन हमारी दोस्ती का भी होता। बस यही सोच कर मैंने सब हालातों पे छोड़ दिया। दादा-दादी ने फिर से हमें घर पे छोड़ने की बात की थी डैडी से। डैडी ने जब बताया तो मैंने भी लौट जाना ही बेहतर समझा। इस्माला और उसके शहर को अंतिम प्रणाम कर के मैं लौट आया।
काफी बर्षों बाद जब में दिल्ली, वज़ीराबाद में CRPF के IT इंस्टिट्यूट से 'O' Level कर रहा था तब मेरी एक लड़के से मुलाक़ात हुई थी और उसने भी यही कहा, "इस्माला तुम्हें बहुत याद करती है। वो मुझे मिली थी मैंने बताया था के तुम यहाँ हो। मेरे पास उसका नंबर है मैं देता हूँ बात कर लेना।“ जिस कागज़ के टुकड़े पे उसने नंबर लिखा था मेरे मन ने उसे खोलने तक की भी अनुमति नहीं दी। क्यूंकि इतने बर्षों की ख़ामोशी के बाद सुनामी ही आ सकती थी और ये सुनामी कहीं उसे पूरी तरह से तबाह भी कर सकती थी।
मुझे नहीं पता मैंने जो निर्णय लिया था उससे उसका कहाँ तक भला हुआ होगा। लेकिन हाँ जितना इस्माला एक बार मिलने के लिए तड़फी थी उतना मैं आज भी तड़फा करता हूँ। मैं जानता हूँ बचपन का वो साथी अब बहुत पीछे छूट गया है और उससे शायद इस जन्म में कभी भेंट भी ना हो। लेकिन कभी - कभी एक कविता में, मैं उसके साथ बिताये हर लम्हे को जी लिया करता हूँ :-
इस जीवन पे तुम्हारा
क़र्ज़ है प्रिय!

क़र्ज़ -
बचपन की उस दोस्ती का
बचपन के उस प्रेम का
जो तुमसे मुझे मिला|

कितना ही प्रेम करती थी तुम मुझे
शायद उससे भी ज्यादा
जिसे तुम चाहती थी|

गुलाब का फूल देते समय
तुम तनिक भी नहीं शर्माती थी
सहेलियां तुम्हारी तुम्हें छेड़ती थीं
तुम फिर भी नहीं शर्माती थी|

इसका कारण यह भी था के
शायद तुमने मुझे मन से
अपना सखा माना था,
जैसे द्रोपदी ने कृष्ण को|
लेकिन मैं ही गंवार समय रहते
तुम्हारे मैत्रीपन के भावों को
समझ ही नहीं पाया||

समाज के न जाने किस डर से
तुम्हें सखी सवीकार ही नहीं पाया|
जिसमें जो भाव तुमने ढूंढे
वो कृष्ण मैं बन ही नहीं पाया|
और आज इतने बर्षों बाद
मन तुम्हें पुकारता है,
आँखें तुम्हें ढूंढती हैं',
तुम्हारा हाथ थाम कर
बचपन की उन्हीं गलियों पे
निकलने को दिल चाहता है
तो तुम कहीं भी नज़र नहीं आती हो||

देश के दुसरे हिस्से से
आया था मैं तुम्हारे शहर में
तुमसे कोई वास्ता भी नहीं था
अजनबी ही थी तुम मेरे लिए
लेकिन शायद तुम्हें मुझ में
किसी जन्म का कोई साथी
दिख ही गया था,
तुम्हारे मन ने मुझे
पहचान ही लिया था|
लेकिन मैं ही पागल
तुम्हें पहचान ना पाया
और अब जब पहचाना है
तो तुम ना जाने कहाँ हो
तुम्हारा ना मिलना ही
इस जन्म में
शायद मेरी सज़ा है||

लेकिन मैं वादा करता हूँ सखी
किसी जन्म में मैं तुमसे फिर मिलूँगा
मैं आऊंगा फिर तुम्हारे लिए,
सिर्फ तुम्हारे लिए
तुम्हारी दोस्ती का कर्ज़
तुम्हारे प्रेम का ऋण
लौटाने के लिए...

short and sweet story in hindi, love stories, cute love story, hindi story, prem kahaniyan

Short and Sweet Story in Hindi - उन्होंने अपने भागने की योजना बनाई और इन योजनाओं को तब तक के लिए लागू कर दिया, जब तक कि युवक के परिवार को इसके बारे में पता नहीं चल गया। लेकिन भागने के बाद जल्दी घर लौटने के बजाय, दोनों कभी वापस नहीं गए।

Short and Sweet Story in Hindi

जब एक कैथोलिक चर्च की एक युवा छात्रा ने अपने शिक्षक से religious sister बनने का फैसला करने के कारणों के बारे में पूछा, तो उसके शिक्षक ने उसे एक दिल दहला देने वाली प्रेम कहानी बताई। कई साल पहले, जब वह एक समान उम्र में थी, शिक्षक (उसे सुश्री पैटरसन कहते हैं) को एक अमीर परिवार के एक युवक से प्यार हो गया। दोनों एक-दूसरे को देखने लगे और जल्दी से एक गहरा संबंध बना लिया।
Short and Sweet Story in Hindi

दुर्भाग्य से, युवक का परिवार रिश्ते के साथ बिल्कुल भी सहमत नहीं था। यहां तक कि उन्होंने अपने बेटे को विदेशों में दूर के विश्वविद्यालय में दाखिला लेने की धमकी दी। जैसा कि सुश्री पैटरसन एक गरीब पृष्ठभूमि से आई थीं, वह संभवतः उस समय उनके साथ जाने के लिए तैयार नहीं थीं। इसका मतलब यह था कि यदि वे संबंध जारी रखना चाहते हैं, तो वे एक-दूसरे से अलग हो जाएंगे चाहे वे चाहें या नहीं।

लेकिन वे दोनों एक-दूसरे के साथ प्यार में पड़ गए थे, जिससे रिश्ता खत्म हो गया - कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या कोई विकल्प नहीं था। इस कारण से, उन्होंने भागने का फैसला किया। गोपनीयता में, उन्होंने अपने भागने की योजना बनाई और इन योजनाओं को तब तक के लिए लागू कर दिया, जब तक कि युवक के परिवार को इसके बारे में पता नहीं चल गया। लेकिन भागने के बाद जल्दी घर लौटने के बजाय, दोनों कभी वापस नहीं गए।

वे चर्च में शामिल हुए, पवित्र आदेश लिए और विभिन्न मानवीय मिशनों के लिए दुनिया की यात्रा शुरू की। दोनों ने 40 साल की यात्रा की और यहां तक कि शादी कर ली, कुछ समय पहले ही आदमी की जिंदगी खत्म हो गई थी।

Cute Love Story

cute love story, love stories, short stories in hindi

एक गुलाबी ग्रीटिंग कार्ड था जिस पर लाल दिल छपा था। कार्ड के अंदर, यह पढ़ा, "मिस यू, माई डियर टेडी बियर।" शिफोल हवाई अड्डे पर मेरी वापसी पर, कई वर्षों के बाद, मैंने उसके लिए कुछ खरीदा ... बस उसके लिए ... हीरे की बालियों की एक जोड़ी। मैं उसे बुरी तरह से याद कर रहा था, जैसा पहले कभी नहीं था।

Cute Love Story in Hindi

मेरे लिए जीवन बदल गया था। मुझे कभी इसका एहसास नहीं हुआ। देर रात की रणनीति कार्यशालाओं में चांदनी का चलना बदल गया। कैंडललाइट डिनर बिजनेस मीटिंग में बदल गया। मीठी और छोटी फोन कॉल ने उसे लंबे समय के टेलीकांफ्रेंस में बदल दिया। उपहार अब प्राथमिकता नहीं थे - हम जो कुछ भी निवेश करते हैं, उससे कुछ ठोस वापसी होनी चाहिए। वेलेंटाइन डे के लिए एक गुलदस्ते पर 5 डॉलर भी खर्च करना व्यर्थ लगता है - आप पार्किंग स्थल शहर की खोज में कम से कम आधे घंटे खो देंगे।
Subscribe for Hindi Cute Love Story

कुल मिलाकर, व्यस्त कार्यालय और भविष्य की योजना से कोई राहत नहीं मिली। जब भी उसने बहुत हल्के-फुल्के प्रयास में, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश की, मेरे पास पूर्वनिर्धारित उत्तर था, "ये सभी हमारे लिए ही हैं, प्रिय," और वह एक-आधे महीने के लिए शांत हो जाएगी।

हाल ही में, मुझे एक हफ्ते के लिए व्यापार यात्रा पर हॉलैंड जाना था। मैं एक महत्वपूर्ण असाइनमेंट पर काम कर रहा था। मेरे पास अपने माता-पिता से बात करने के लिए पाँच मिनट भी नहीं थे जो हमसे मिलने के लिए पंद्रह सौ मील से अधिक की यात्रा करते थे। मैंने उसे सूचित करने के लिए फोन किया कि मुझे उस शाम को छोड़ना होगा। यह उसके लिए कोई नई बात नहीं थी। यह कई बार हुआ, और हर बार, शाम को, मैंने उसे दरवाजे पर खड़ा पाया, मुस्कुराते हुए, मेरा सूटकेस सभी आवश्यक सामानों के साथ पैक किया।

दोपहर के 3 बजे थे। वरिष्ठ प्रबंधन से मिलने से पहले मैं अपनी प्रस्तुति का पूर्वाभ्यास करना चाहता था। मुझे यकीन था कि उसने फाइल रख ली होगी। अतीत में, वह कभी नहीं चूकती थी जो मुझे चाहिए था, कभी नहीं। लेकिन मैं अपने गुस्से को नियंत्रित नहीं कर सका। मैंने अपने चमड़े के आवरण वाले सैमसोनाइट को खोला और फ़ाइल वहां नहीं थी !!! मैंने क्राउन इन की रसीली मंजिल पर एक-एक करके कपड़े उतार दिए या फेंक दिए।

"यह रहा!” मैंने आह भरी। मुझे पता था कि वह कभी भी मेरे सूक्ष्म स्वाद और कभी न खत्म होने वाली क्षुद्र मांगों से नहीं चूकती थी। और इस महत्वपूर्ण फाइल के लिए, मैंने उसे विशेष रूप से याद दिलाया था।

मैंने फाइल खोल दी। एक गुलाबी लिफाफा था, कुछ वैसा ही जैसा हम अपनी शादी से पहले, एक लंबे समय पहले आदान-प्रदान करते थे। उन दिनों, इंटरनेट पर लव नोट्स नहीं बनाए गए थे। बारह साल से ज्यादा हो गए थे।

मैंने लिफाफा खोला। इसमें हमारी पारिवारिक फोटो थी, उसके साथ और हमारे दो छोटे बच्चे थे। हम सब मुस्कुरा रहे थे। एक गुलाबी ग्रीटिंग कार्ड था जिस पर लाल दिल छपा था। कार्ड के अंदर, यह पढ़ा, "मिस यू, माई डियर टेडी बियर।" शिफोल हवाई अड्डे पर मेरी वापसी पर, कई वर्षों के बाद, मैंने उसके लिए कुछ खरीदा ... बस उसके लिए ... हीरे की बालियों की एक जोड़ी। मैं उसे बुरी तरह से याद कर रहा था, जैसा पहले कभी नहीं था।

Read This Cute Love Story: स्वप्न सुंदरी

error: Content is protected !!