Ghazal Shayari

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Ghazal is a collection of Sher's (couplets) which follow the rules of 'Matla', 'Maqta', 'Beher', 'Kaafiyaa' and 'Radeef' which is little longer than other forms of poetry and contains more words and mostly written in 6 to 10 lines. New_Ghazal_ShayariUrdu_Ghazal_Shayari and Ghazal_Poetry are the keywords of this shayari. Here you can learn and read latest Urdu Ghazal Shayari.  Because, we have some of the best_sad_ghazals and romantic_ghazals available on the internet in Hindi and English Script and you can check another categories ishq shayari, love shayari, romantic shayari and sad shayari .

Ghazal Shayari, Khet Ye Dil Ke Banzar Ho Jayenge

Ghazal Shayari, Kisi Tarah Jo Gar Hum

Yun To  Kuchh Aur  Bhi Hum  Behtar  Ho Jayenge
Kisi  Tarah   Jo  Gar   Hum   Patthar   Ho  Jayenge



Fark   Chahe   Kitna  Hi   Ho   Darmiya.n   Humare
Kisi Jahan Mein Magar Dono Barabar Ho Jayenge

Ataa Hai  Hunar Ye  Faqt Tumhari  Hi Aankhon Ko
Jis Taraf Bhi  Tum Dekhoge  Manzar  Ho Jayenge

Yun Hi  Hari-Bhari Rahein  Faslein  Tere  Gham Ki
Vagarna   Khet  Ye   Dil  Ke  Banzar  Ho  Jayenge

Fir  Laut Ke  Aana Bas  Mein Naa  Hoga  Humare
Jo Khud Hi  Apne Gar  Hum Rahbar  Ho Jayenge

Akl  Mein   Nahi   Baithti   Jinke   Batein   Humari
Kabhi Unhi Ke Liye  Hum Paigamber Ho Jayenge

Uski Yaad  Ke Siva  Naa  Hai  Kuchh  Paas  Apne
Jo Wo Bhi  Naa Rahi  To Fir  Beghar Ho Jayenge

Ghazal Shayari, किसी तरह जो ग़र हम

यूँ तो कुछ  और भी हम  बेहतर  हो जायेंगे
किसी  तरह  जो ग़र  हम  पत्थर हो जायेंगे

फ़र्क चाहे  कितना  ही हो  दरमियाँ  हमारे
किसी जहाँ में मगर दोनों बराबर हो जायेंगे

अता है हुनर ये फ़क्त तुम्हारी ही आँखों को
जिस तरफ भी तुम देखोगे  मंज़र हो जायेंगे

यूँ ही  हरी-भरी  रहें  फसलें  तेरे  ग़म  की
वगर्ना  खेत ये  दिल  के  बंज़र  हो  जायेंगे

फिर लौट के आना  बस में ना होगा हमारे
जो खुद ही अपने ग़र हम रहबर हो जायेंगे

अक्ल में  नहीं बैठतीं  जिनके  बातें हमारी
कभी उन्ही के लिए  हम पैग़ंबर हो जायेंगे

उसकी याद के सिवा ना है कुछ पास अपने
जो वो भी ना  रही तो फिर  बेघर हो जायेंगे

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Main Chahta Hu Ho Jaoun Pagal | Ghazal Shayari

Romantic Shayari 2019

वफ़ा की हद से तेरे लिए चाहता हूँ गुज़र जाऊँ
दग़ा जो करूँ तुमसे मैं तो खुदा करे मर जाऊँ



दिल-ओ-जां से पहले भी मैं इश्क़ में तेरे लिए
लहू का क़तरा - क़तरा भी कुर्बां कर जाऊँ

मैं चाहता हूँ के हो जाऊँ पाग़ल इश्क़ में तेरे
मैं चाहता हूँ तेरी आँखों में ही बिखर जाऊँ

मैं जानता हूँ डूब जाऊँगा तेरी आँखों में फिर
दिल चाहता है इस समंदर में पर उतर जाऊँ

बस इतना ही काफी है इस बेवफ़ा ज़माने में
तुम मुझ में ठहर जाओ मैं तुम में ठहर जाऊँ



Romantic Shayari 2019 Image

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Tera Kareeb Aana Yun To Lubata Hai | Ghazal Shayari

Ghazal Shayari - 2019 New Ghazal

गोया तेरा करीब आना यूँ तो लुभाता है
पर अब जुदा रहने में ही करार आता है



वीरानों की सिम्त जाता हुआ इक रस्ता
मुझको रह-रह कर बार-बार बुलाता है

तुम्हें नाज़ है बहुत यूँ अपने होने पर भी
और मुझे अपना होना भी बहुत सताता है

चाहता हूँ छोड़ दूँ इश्क़ की जद्दोजहद भी
के मेरे अंदर का बुद्ध अब मुझे बुलाता है

मेरी मानो इश्क़ की दुश्वारियों से दूर रहें
जुदा रहें हम अब भी यह इक रास्ता है

पर जाने क्यों अब भी मज़ार-ए-इश्क़ पे
दिल अब भी शम-ए-उम्मीद जलाता है

Ghazal Shayari - 2019 New Ghazal

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15/12/2018 7:58PM
#SunnySinghAkash




ये उदास क्यों करने लगा है तेरा अब इश्क़ मुझे | Ghazal Shayari

गैर के जिस्म में भी तुम्हारा अक्स ढूंढा करता हूँ
मैं तुम्हारी तलाश में कहाँ-कहाँ नहीं भटकता हूँ
मोहब्बत की नस्लों को ही जो मिटा देना चाहती हों
मैं ऐसे रस्मों-रिवाज़ों को जूते की नोक पे रखता हूँ
तुम मिल कर फिर से बिछड़ गए तो क्या होगा
तुम्हारी जुस्तजू में निकला तो हूँ मगर डरता हूँ
ये उदास क्यों करने लगा है तेरा अब इश्क़ मुझे
उस इश्क़ को क्या हुआ मैं जिससे राहत पाता हूँ
तुम्हारा ग़म अब दिल के लहू में भी घुल गया है
तुम्हें जान के दुःख होगा के मैं अब लहू थूकता हूँ
दिल तो निसार कर ही चूका था मैं कब का तुम पर
इक जां बची थी लो आज वो भी निसार करता हूँ
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07/12/2018 11:49AM
#SunnySinghAkash



Ghazal Shayari, Ye Jo Ishq Hai Na Fana Hone ka Bas Jazba Hai

Ishq Shayari, 21st century Ishq Ghazal shayari

रूहों के लिए जज़ा, जिस्मों के लिए सज़ा है
ये जो इश्क़ है न फ़ना होने का बस जज़्बा है



तेरे बदन की जो खुशबू नहीं जिस फ़ज़ा में
मुझको रास ना कतई ऐसी आब-ओ-हवा है

छाई हुई है आसमां पे तेरी ज़ुल्फ़ की घटा
हर फूल का यौवन तेरे बदन की फ़ज़ा है

मेरे दिल पे जो करते हो महसूस ज़ख्म तुम
वो ज़ख्म नहीं तेरा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा है

मैंने आज फिर छेड़ दिए तेरे किस्से सरेआम
मुझ से आज फिर से दिल बहुत ही खफ़ा है

New 21st Century Ishq Shayari

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27/11/2018 9:28 AM
#SunnySinghAkash




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