Kabhi socha tha kisi ne kya hai ye corona
Jo haste the hamesha unhe bhi pad gaya hai aaj rona
Jo rahte the sab ke sath aaj hai akele
Par baat yhi tak nhi hai jisse pad rha hai zindgi mein dhona
Kabhi garam kada to piya hai na tumne
Kabhi raato mein neend nhi aati kyuki din mein hai sona
Kabhi socha tha kisi ne kya hai ye corona
Kabhi bachon ki fikar kabhi bado ke liye dar
Kabhi kaam ki hai fikar to kabhi pyar ki jarurat
Par  koi samajh hi nahi rha kya hai is bimari ki fitrat
Kabhi socha tha kisi ne kya hai ye corona
Acha lagta hai sath rehna par sab hai majbur
Par hai kuch apno ke liye isliye rehte hai sabse dur
Samjho agar isse to akelapan hai karona
Ji raha hai insaan magar chahe ro kar pade jeena
Kabhi socha tha kisi ne kya hai ye corona
Tumhara ruthna fir mujhe manana
Fir thoda samjhana fir khud hi ruth jaana
Fir dheere se kehna kuch kehna tha tumse
Fir khud hi bhul gaya kehkar so jana
Tere iss pyar par mar mite hai hum
Par aajkal kuch akele se lag rahe hai hum
Kabhi badi badi baaton ko bhi has kar taal dena
Kabhi choti choti baaton par bacho ki trah ruth jana
Kabhi itna pyar jatana ki bhul jaaye sab kuch
Fir kabhi apne kaam mein mujhe hi bhool jana
Tere iss pyar par mar mite hai hum
Par aajkal kuch akele se lag rahe hai hum
Kuch kamiya hai mujhme kuch achai hai tujhme
Par phir bhi mukamal hai rishte hain
Kabhi haste hai kabhi rote hai
Phir bhi sabhi raste sath hote hai
Tere iss pyar par mar mite hai hum
Par aajkal kuch akele se lag rahe hai hum

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Ye Duniya parayi hai,

Sabne thokar khayi hai,

Ye raat ka akelapan,

Aur mann ka dhundlapan,

Sochne pe majboor karta hai,

Aakhir dil dhadakta kyu hai,

Aakhir insaan jeeta kyu hai,

Logo ke chehre pe mukhota kyu hai,

Muh pe hasi fir dil rota kyu hai,

Me shayar to nahi,

Magar ye zalim zindagi,

Lafz pirone ka mauka deti nahi,

Kuch alfazo se apne haalat bayan kare,

Itni ahsaan ye zindagi hoti nahi..

Kaun akela hai ,

Kaun hasne ka dikhava kar raha hai

Ye zindagi har pal naya pana khol rahi hai,

Har din naya itihas rach rahi hai,

Apna kaam aur naam gehri shahi se likh lo,

Duniyawale to bas sab mitane me lage hue hai ye baat samajh lo..

Tumhare mathe ki Sindoor door karti hai mujhe tumse door, kash ye Sindoor mere nam ki hoti tere mate par ,hota aasman mere kadmoo main ,khushi dekh jalti mujse, hasi bhi kuch sikh jati mujse, hoti nahi chahat mujhe kisi aur cheej ki, tere hath aur mere hath kuch jude ho aaise jaise sagar ki laharoon ki jaiase ,dekh kar jee leta jindgi bas tumhare palkoon ke chaw tale ,tumhare sihrane main gujar jati meri jindgi bas tumhara nam lete

Ek anjana sa sapna jo roz raat ko aata hai or chhor deta hai man mai kayi sawal..

Kuch yu hai ki…. Roz ek anjaan si metro mai ehsaas hota hai kisi ke hone ka….. Na pata maaloom hai or na he manzil…. bas mehsoos hota hai kisi apne ka hona…..

Metro band hote he bas ye baichaini use dhundne nikal jaati hai har jaghe uss metro mai uss anjaan se sakhs ko dhundne….. Par antt mai niraas hoke wahi thakaan or wahi maayusi haath lagti hai.. or chhor deti hai mujhe wahi bich raaste mai jaha se mujhe kidhar jana hai ye mujhe pata nhi….. Bas uss shakss ko dhundne mai bikhar jaati hai meri har raat…. or isi uljhan mai nikal jata hai pura din ki kon tha wo…. kon hai wo jo dikhta to nhi hai bas saath chhor deta hai ek baichaini ka kisi ke hone ka…..!!!!!

BY – JIYA

  • ye chand sa tera noor
    karta hai mujhe choor choor
    jab bhi ankhe tujhe dekhe
    anand leti hain ye bharpoor

Depression Shayari

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दिल का दिल को ही अब राज़दाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

शफ़्फ़ाफ़ आईना था मैं तो
पर वक़्त ने किया मुझे धूल है
अज़ाब कई आए मेरे दिल पे
पर क्या हुआ कहना फ़ुज़ूल है
हर हद तक की जद्दोजहद मैंने
पर अब सब मुझ को क़ुबूल है

दिल का उजड़ा हुआ ही मकाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

मेरे लबों पे मेरी कहानी आने दो
सर से ऊपर तक पानी आने दो
रूबरू हो सकूँ जहाँ खुद से मैं
डगर ऐसी भी अनजानी आने दो
आखिर कुछ तो मिले मुकम्मल
वीरानी है तो फिर वीरानी आने दो

किसी को तो मेरे वजूद का पासबाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

जब से दुनिया में बट गया हूँ
अपनी जड़ों से ही कट गया हूँ
अपनी ही बस्ती में अज़नबी हूँ
तारिक बादलों सा छट गया हूँ
याद तुम भी जब आये मुझे तो
मैं लेता करवट करवट गया हूँ

शायद लौटूं कभी मैं, अपने निशाँ रहने दो
आज़ार-ए-जाँ है तो आज़ार-ए-जाँ रहने दो

17/06/2020 11:47 AM

Akelapan Shayari

Akelapan Shayari

यूँ तो तुम्हें मैं भूल भी गया था कई बार, NAZM SHAYARI, hindi shayari,

यूँ तो तुम्हें मैं भूल भी गया था कई बार
दिल को समझा भी लिया था कई बार
मैंने अहद-ए-वफ़ा भी था तोड़ दिया
अतीत का दामन भी था छोड़ दिया
पर फिर भी तुमने मुझसे वास्ता रखा
तुम तक आने का इक रास्ता रखा
तुमने अक्सर अतीत से आ-आ कर
प्रेम के भूले-बिसरे नग़्मे गा-गा कर
दिल की बेचैनी को बढ़ाती रही हो
तुम सपना बन-बनके आती रही हो

22/06/2020 1:28 PM

वो खेलती रही, जैसे दिल खिलौना हो मेरा,
दर्द तो तब हुआ, जब उसने कहा,
सिर्फ़ तू ही तो दोस्त नहीं है मेरा.

मोहोबत वो नहीं जिसमे दर्द ना हो,
मोहोबत तो वो है जिसमे दर्द और
हमदर्द दोनों हों.

Shayari on life or life shayari in hindi: ज़िंदगी सुख दुख का सवरूप है और ज़िंदगी के सुख दुःख को शायरी में किस तरह से बयाँ किया जाता है आइये "वंदना माथुर" से सीखते हैं।

shayari on zindagi

shayari on life

गुंजाईश तो रहती है
ज़िंदगी की शाख पर
उम्मीद की कोंपल आने की।

इक तलाश सी रही है तू जिंदगी,
कभी धुप तपती सी,
कही संदली सी शाम रही है जिंदगी,

मिलने की उम्मीद में शामिल है तू जिंदगी,
गुम हो गई सब उम्मीद कभी,
नज़र आती रही तू ए जिंदगी,

आहट सी सुनाई देती है तेरी जिंदगी,
खामोश रहती है कभी,
कभी बतियाती बहुत तु ए जिंदगी,

साथ रहकर हमेशा
खुद में ही गुम रही तू जिंदगी,
अनजान है जिस शय से तू
उसकी तलाश रही है तू जिंदगी।

हूँ इक ईश्वरीय कृति मैं,
देती जीवन को आकृति मैं,
फिर भी क्यों रहती अतृप्त हूँ मैं
खुद के लिए विष क्यों
दुसरों के लिए अमृत हूँ मैं ,
है हवन जैसे जीवन और
आहुति का घृत हूँ मैं।।

मुमकिन नहीं किसी को मुकम्मल कर पाना,
मुनासिब तो है मगर खुद ही को सवार पाना।

इक प्याला खाली सा,
चाय के लिए ललचाए,
कड़क चाय सी जिंदगी,
धीमी आँच से रंग चुराए,
महक है पाश इसका,
दूर दूर से पास बुलाए।

अनमोल हैं मेरे बोल,
किंतु मैं सब पर खर्च करता नहीं,
जो हो नैतिकता के विरुद्ध
वो मैं जान बूझकर करता नहीं ,
माँ, बहन,बेटी ,बहुँ का
सब रखते मान
मैं किसी स्त्री पुरुष कि
अवेलहना करता नहीं।

मुमकिन है नाराज़गी हो
मगर हूँ इन्सान मैं
अपनी अहमियत मैं भुला नहीं
बोली बोलुँ ऐसी प्रभु जो
पराये भी बंध जाएं,
तेरी दी अनमोल भेंट की
अवहेलना मैं करता नहीं।

छोटी छोटी खुशीयाँ है बस ढूंढ लीजिए
वक्त को आजमाए नहीं चटकारे लीजिए।

शाम आ बैठी है शाखों पर,
टहनी पर सूरज अटका है।
दूर दूर से लौट रहे परिंदे,
इस शज़र पर उनका घरोंदा है।

Life Shayari in Hindi

कुछ ख्वाब हैं अधूरे से,
कुछ ख्वाहिशें अनदेखी सी

कुछ बातें हैं बेतुकी सी,
कुछ बचकानी सी नादानी,

कुछ इश्क़ का है फ़ितूर भी,
और कुछ हम भी दिवाने से

तू जिंदगी भी मुझ जैसी है
थोड़ी सी अल्हड थोड़ी सी सयानी।

ऐब हैं दो मुझ में,

इक जिद्द इमान की
दूजी अना कमाल की ,

जिंदगी हमने यूँ ही
बेवजह तन्हा गूज़ार दी।

जिंदगानी का सफर है
कुछ टूट कर अंतर में बिखरा भी होगा,
कोई नहीं चला होगा जब साथ
कुछ पल तन्हाई में गुज़रा होगा,

खोया बहुत कुछ होगा सफर में तू ने
गौर कर खुद को पाया भी होगा।

होगा बहुत लम्बा इम्तिहान जिंदगी का
मगर कुछ हुनर सिखाया तो होगा,
धुप तेज़ होगी तपिश भी रही होगी मगर
कोई घनेरा दरख़्त आया तो होगा

बहुत कटीली राहों सी में कोई
गुलशन न सही गुल बन कोई
मुस्कान 'वंदना' लाया तो होगा।

Zindagi Sad Shayari

बेरंग नहीं है जिंदगी,
बस काले रंज का ये कैनवास है!

मुमकिन नहीं मिट जाता रंज,
रंज को दे सवार वो ही चित्रकार है!!

बिखरे हैं उम्मीद के रंग,
कुछ अलग है मगर मेरा कैनवास है!!

तुझ पर हाँ हक मेरा भी तो है,
दिल में इक जिक्र तेरा भी तो है,

हर पल युँ अब तो तेरा ख्याल है,
तुझ बिन ए दोस्त जिंदगी मलाल है।

कुछ फासले भी हैं जरुरी करीब आने के लिए,
कुछ दूरियां हैं, मुक्कमल खुद को पाने के लिए,
छुपा ख्याल में तू अब जरुरी तू है नज़र आने के लिए,
बर्बाद रहे हैं बहुत अब संभलना है जरुरी जीने के लिए

जिंदगी की राहों में हमसे लोग मिलते रहे बिछड़ते रहे,
कुछ सफर हम तन्हा कुछ संग काफिले के करते रहे,

अजनबी मिले कुछ दोस्त हमसे मिले कुछ अनजाने रहे,
कभी मनमानी तो कभी सुलह जिंदगानी से हम करते रहे,

वक्त के साथ चले कभी हम वक्त के इशारे को निभाते रहे,
आज और कल के बीच बहते दरिया के इस पार हम खड़े रहे।

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